ये पोस्ट बिना कोई स्कोर जाने और देखे हुए लिख रहे हैं। टीवी पर तो किसी और खिलाड़ी को देखने का सोचते भी नहीं है हम। इसके लिए गाली मत दीजिएगा हमको क्योंकि हम आपके किसी भी पसंदीदा खिलाड़ी से नफरत नहीं करते हैं बल्कि किसी एक खिलाड़ी से इतनी मोहब्बत है कि उसके सिवा किसी और को विकेटकीपर के रूप में देखने में अजीब लगता है। सबके लिए एक बहुत बड़े महोत्सव का शुरुआत हुआ है और मेरे लिए मेरे आदर्श को देखने के दिन आ रहे हैं। रिपोर्टिंग पर है, पंचायत चुनाव है, पिछले साल भी यही स्थिति थी और शायद इस साल भी नहीं देख पाएंगे साहब को लेकिन कल कोशिश करेंगे कि साहब का पहला मैच देख लें।

अरे ये मत सोचिए कि उसके जीतने के लिए हम उसका मैच देखना चाहते हैं, बल्कि सिर्फ इसलिए क्योंकि वो हंसते हुए आएगा और हार या जीत में कोई शक्ल ना बना कर ये साबित करके जाएगा कि उसके जैसा कप्तान कभी पैदा नहीं होगा। वो अगर जीत जाएगा तो बहुत आसानी से कह देगा कि “वेल इट वॉज द टीम हू प्लेड वेल” और अगर गलती से वो हार गया तो बड़े ही शांति से कहेगा कि “वेल कैप्टन हैज़ टू लुक आफ्टर एवरीथिंग” आपको लग रहा होगा कि हम उसके भावनाओं में इतने बह गए हैं कि पागलपंती जैसा कुछ भी लिख रहे हैं लेकिन आप नहीं समझ सकते हैं झारखंड के उस लड़के की कहानी जिसने अकेले अपने बूते पर पूरे भारत को अपना दीवाना बना दिया। वो जब सात नंबर की जर्सी पहनकर कल खेलने आएगा तो ना जाने मेरे जैसे कई नौजवान अपना काम छोड़कर टीवी के सामने बैठकर इस बात का इंतजार कर रहे होंगे कि आखिरी गेंद पर फिर से वो छक्का मारकर, मैच जितवा देगा और आप स्टैंड में चिल्लाकर कहेंगे कि हां माही जैसा कोई नहीं हो सकता।

हम ये सब लिखकर उसका तारीफ नहीं कर रहे हैं, बस अपनी भावनाओं को प्रकट कर रहे हैं क्योंकि एक प्रशंसक और कर भी क्या सकता है? हमको पता है कि वो इस पोस्ट को नहीं पढ़ेगा, हमको पता है कि मेरे जैसे कई लड़के उसके लिए हजारों शब्द लिखेंगे, हमको ये भी पता है कि हम उसके फैन फॉलोइंग का एक हिस्सा भी हम नहीं है लेकिन अफसोस कि हमको इस बात का कोई अफसोस नहीं है। हमको फक्र है कि मेरा आदर्श कइयों का आदर्श है, हमको गुमान है कि हम जिसको अपना आदर्श मानते हैं उससे आईपीएल टीम के सारे कप्तान और सारे मालिक थरथर कांपते हैं। ये बात हम इसलिए नहीं लिख रहे हैं क्योंकि हमको उसको बड़ा दिखाना है बल्कि इसलिए लिख रहे हैं ताकि आपको मालूम पड़ सके कि कल एक शहंशाह मैदान में घुसेगा, अपने दोनों हाथ में ग्लव्स पहन कर और तब अंपायर साहब भी सोचेंगे कि कोई खेलने आया है।

खैर, हमें इंतजार है उस माही का जो जीतने और हारने से ज्यादा लड़ने में विश्वास रखता है। हमें इंतजार है उस माही का जिसे अच्छा क्रिकेटर से ज्यादा अच्छा इंसान बनना पसंद है। हमें इंतजार है उस माही का जिसने अपनी बेटी को ना देखने के लिए ये कहा था कि उसके लिए देश पहले आता है और हमें इंतजार है उस छोटे से शहर के बड़े ख्वाब देखने वाले लड़के का जो ना जाने हम जैसे कईयों को सपना देखना सिखाया और ये समझाया कि जो तुम सोचते हो, वो हो सकता है। तुम मैदान में यूं ही हंसते हुए आना, हम सारा काम छोड़कर तुमको देखेंगे और शाहंशाओं की तरह तुम्हारा स्वागत करेंगे।

तुम्हारा प्रशांत

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