भारत ने तीसरी वैक्सीन स्पूतनिक V के इमरजेंसी इस्तेमाल की इज़ाजत देने के एक दिन बाद ही दुनियाभर की दूसरी वैक्सीनों के लिए दरवाजे खोलने का रास्ता साफ कर दिया है. अब भारत दुनियाभर के दूसरे देशों में इमरजेंसी इस्तेमाल के लिए इजाजत पा चुकी वैक्सीन को भी भारत में इस्तेमाल करने को राजी हो गया है. यह फैसला भारत की हेल्थ मिनिस्ट्री ने एक्सपर्ट्स ग्रुप की राय के बाद लिया है. फैसले की जानकारी देते हुए मंत्रालय ने बताया कि किन हालातों में ऐसा फैसला लेना पड़ा है. आइए जानते हैं विस्तार से इस बड़े कदम के बारे में

‘परिस्थिति के हिसाब से लिया फैसला’

सरकार ने बताया है कि उसने कोविड 19 संकट से लड़ने के लिए मई 2020 में ही टास्ट फोर्स बना कर काम करना शुरू कर दिया था. भारत अकेला ऐसा देश है, जहां इस्तेमाल हो रही दोनों वैक्सीन अपने ही देश में बनी हैं. मंत्रालय का कहना है कि

सरकार ने भारत में बनी दो वैक्सीन कोविशील्ड और कोवैक्सीन को रणनीतिक फैसले के तहत इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दी है. वैक्सीन कोविड कंट्रोल और मैनेजमेंट का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है. अब भारत अपनी वैक्सीन की बास्केट बड़ी करने पर विचार कर रहा है. यानी दुनिया भर से दूसरी वैक्सीन को भी भारत में लाया जाएगा. ऐसा करने के पीछे बड़ा कारण वैक्सीनेशन के प्रोसेस को तेज करना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन उपलब्ध कराना है. इसे लेकर नीति आयोग के मेंबर, डॉक्टर वीके पॉल की अध्यक्षता में 11 अप्रैल 2021 को वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन के नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप की 23 वीं मीटिंग में चर्चा हुई.

नीति आयोग के सदस्य वीके पॉल की अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी ने फैसला लिया कि विदेशों में इमरजेंसी अप्रूवल पा चुकी वैक्सीन को भी भारत लाया जाए. (फोटो-एएनआई)

विदेश की वैक्सीन भारत में कैसे इस्तेमाल होगी?

इस महत्वपूर्ण मीटिंग में इस बड़े सवाल पर विचार किया गया कि दूसरे देशों की कौन सी कोरोना वैक्सीन हैं, जिन्हें भारत में इस्तेमाल किया जा सकता है. और इन्हें इस्तेमाल करने का प्रोटोकॉल क्या रखा जाए? एक्सपर्ट ग्रुप इस नतीजे पर पहुंचा कि विदेशों में इस्तेमाल होने वाली 2 तरह की वैक्सीन को भारत में भी इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत दे दी जाए. एक तो वह वैक्सीन जो दूसरे देशों में वहां की ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी से इमरजेंसी यूज अप्रूवल पा चुकी हों और दूसरी वो जिन्हें WHO ने अपनी इमरजेंसी यूज लिस्ट में डाल रखा हो. ऐसी वैक्सीन को भारत में इस्तेमाल के लिए भी अप्रूवल दिया जाए.

इसके साथ ही एक्सपर्ट ग्रुप का यह भी मानना है कि इन वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल के साथ ही इनके समानांतर लोकल क्लीनिकल ट्रायल भी किए जाएं. जिनसे पता किया जा सके कि ये भारत के लोगों और वातावरण में कितनी कारगर हैं. इतना ही नहीं भारत में जिन 100 लोगों को शुरुआत में ये वैक्सीन दी जाएगी, उन्हें 7 दिनों तक ऑब्जर्वेशन में रखा जाएगा. उसके बाद सुरक्षित पाए जाने पर ही किसी वैक्सीन को पूरे देश के लिए जारी किया जाए.

बता दें कि फिलहाल देश में भारत बायोटिक की वैक्सीन कोवैक्सीन और सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया की वैक्सीन कोविशील्ड लोगों को दी जा रही है. इसके अलावा भारत ने रूस में विकसित की गई स्पूतनिक V नाम की वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाजत भी दे दी है. इसके मई तक भारत पहुंचने की उम्मीद है. भारत में स्पूतनिक V वैक्सीन को भारत की कंपनी रेड्डीज लेबोरेटरी में भी बनाए जाने की तैयारी है. जानकारों का मानना है कि जैसे ही उपलब्ध वैक्सीन की मात्रा बढ़ेगी, वैक्सीन लेने की उम्र को 45 साल से नीचे करने पर भी विचार किया जाएगा. फिलहाल कई राज्यों से वैक्सीन की कमी की खबरें आ रही हैं और वैक्सीन सेंटर बंद भी हुए हैं.

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