भारत में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर के कारण रोज हैरान करने देने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं. लेकिन धार्मिक स्थलों पर लोगों का भारी भीड़ में इकट्ठा होना रुक नहीं रहा. इसकी सबसे बड़ी मिसाल हरिद्वार कुंभ (Haridwar Kumbh) में देखने को मिल रही हैं. यहां बढ़ती भीड़ के चलते उत्तराखंड सरकार को कोविड कंट्रोल के बेसिक प्रोटोकॉल फॉलो करवाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. भीड़ के कारण ना तो ढंग से थर्मल स्कैनिंग हो रही है और ना ही लोग मास्क पहन रहे हैं. सोमवार (12 अप्रैल) को 30 लाख से भी ज्यादा श्रद्धालु दूसरे शाही स्नान के लिए आए. किसी ने मास्क पहना था तो किसी ने नहीं. सब अपनी मनमर्जी में दिखाई दिए.

अब खबर है कि राज्य के मेडिकल डिपार्टमेंट ने सोमवार को जिन 18,169 श्रद्धालुओं का कोरोना टेस्ट किया था, उनमें से 102 पॉजिटिव निकले हैं. हालांकि सोमवार को ही राज्य के डीजीपी ने दावा किया था कि हरिद्वार कुंभ सुपर स्प्रेडर की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.

‘सुपर स्प्रेडर नहीं है कुंभ’

दरअसल, इंडिया टुडे टीवी के एक कार्यक्रम में उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने कहा था कि भले ही कुंभ मेले में भीड़ हो, लेकिन इसे सुपर स्प्रेडर नहीं कहा जा सकता. पुलिस के आला अधिकारी ने इसका तर्क भी दिया. कहा,

‘कुंभ मेला किसी बंद जगह पर नहीं बल्कि एक खुली जगह पर हो रहा है. गंगा नदी का पानी भी रुका हुआ नहीं है. वह लगातार बह रहा है. 90 फीसदी लोग भी आने के बाद वापस चले जाते हैं. ऐसे में डेटा से यही पता चल रहा है कि यह एक सुपर स्प्रेडर इवेंट नहीं है.’

“Data shows that Kumbh is not a super spreader”: Ashok Kumar, Uttarakhand DGP on #COVID norms being violated during #Mahakumbh2021 #Coronavirus#COVID19 #NewsToday | @sardesairajdeeppic.twitter.com/kclMvZI0Tg

वहीं, राज्य के सीएम तीरथ सिंह रावत के अपने दावे हैं. उनका कहना है कि कोरोना संकट के मद्देनजर कुंभ मेले में हर तरह की सावधानी बरती जा रही है और प्रशासन पूरी मशक्कत से लगा हुआ है. हालांकि कुंभ में लाखों लोगों की भीड़ की तस्वीरें और श्रद्धालुओं के बीच कोविड केसों का मिलना सीएम तीरथ सिंह रावत के दावों पर सवाल खड़ा करता है.

न रिपोर्ट चेक हो रही, न मास्क

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, कुंभ मेले के दौरान कोरोना को लेकर किए गए इंतजाम काफी ढीले हैं. अखबार ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट में लिखा है कि न तो सख्ती से लोगों के RT-PCR टेस्ट रिपोर्ट जांची जा रही हैं और ना ही मास्क को पहनने पर कोई जोर है. जबकि मेला प्रशासन की तरफ से दावा किया जा रहा था कि एक खास एआई तकनीक के जरिए मास्क न पहनने वालों की पहचान करके उन्हें रोका जाएगा. रिपोर्ट में कुछ श्रद्धालुओं के हवाले से बताया गया है कि ना तो उनकी रिपोर्ट चेक की गई है और ना ही उनकी थर्मल स्कैनिंग हुई.

मेला अधिकारियों के अपने तर्क

उधर, कुंभ में आए लोगों में वायरस मिलने की खबरों के बीच मेले के अधिकारियों के अपने तर्क हैं. मिसाल के तौर पर मेले के कोविड इंचार्ज डॉक्टर अविनाश खन्ना का कहना है,

‘थर्मल स्कैनिंग और रैपिड एंटीजन टेस्ट प्रदेश के बॉर्डर, रेलवे स्टेशन और घाटों पर हो रहे हैं. घाटों को आज सुबह अखाड़ों के लिए रिजर्व किया गया है ऐसे में आज यहां स्क्रीनिंग और टेस्ट नहीं किए जा सके. अखाड़ों का स्नान खत्म होने के बाद यह काम फिर से शुरू होगा.’

कुंभ मेला के आईजी संजय गुंजयाल की भी सुनिए,

‘मास्क को लेकर चालान और थर्मल स्कैनिंग इसलिए रुकी है क्योंकि इसकी वजह से किसी एक जगह पर काफी भीड़ हो जाती है.’

अखबार के मुताबिक, मेले के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि उनका भीड़ को मैनेज करने पर ज्यादा फोकस है. ऐसे में घाटों पर रिपोर्ट चेक करने और स्क्रीनिंग के काम को रोक दिया गया है. यानी मेला प्रशासन एक तरह से खुद इस बात को मान रहा है कि वहां कोरोना संकट से निपटने के इंतजाम पुख्ता नहीं हैं.

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