हाथरस की दर्दनाक घटना के लगभग 3 महीने बाद सीबीआई की जांच के बाद सीबीआई ने अपने चार्जशीट में पीड़िता के साथ गैंगरेप और हत्या की बात शामिल की है। इसके बाद ये साफ हो गया है कि जो जातिगत संगठन आरोपियों के पक्ष में पंचायत कर रहे थे वो बिल्कुल गलत और राजनीति से प्रेरित था। तमाम मीडिया हाउस और न्यूज चैनल भी पीड़िता और उसके परिवार के बयान पर सवाल उठा रहे थे। वो सब झूठे साबित हो गए।
दरअसल कुछ महीने पहले हाथरस में एक 19 वर्षीय दलित लड़की का उच्ची जाति के चार युवकों द्वारा गैंगरेप के बाद हत्या की गई थी। उसके जबान भी काटे गए थे। पीड़िता ने मृत्यु सैया पर पड़े हुवे अपने साथ दरिंदगी को बात बताई थी।
सीबीआई ने अपने चार्जशीट में गांव के ही चार युवक, संदीप, रामू, रवि और लवकुश पर हत्या (सेक्शन 302) और गैंगरेप( सेक्शन 376) का केस दर्ज किया है। सीबीआई कोर्ट ने इसकी अगली सुनवाई 4 जनवरी को रखी है। वहीं इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में इसकी सुनवाई 27 जनवरी को होगी।
सीबीआई ने 11 अक्टूबर को केस अपने हाथों में लिया था। हालांकि फोरेंसिक जांच रिपोर्ट पहले ही आ गई थी। सीबीआई ने 2000 पन्नों का चार्जशीट दायर किया है। गौरतलब हो कि पीड़िता की मृत्यु 29 सितंबर को दिल्ली के सफदजंग अस्पताल में हो गई थी। जिसके एक दिन बाद आधी रात को बिना उसके परिवार के मर्जी के उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया था।एडीजी लॉ एंड ऑर्डर प्रशांत कुमार ने तब कहा था। कि पिडिता का रेप नहीं हुआ है। उच्ची जाति के लोगों द्वारा भी आरोपियों के समर्थन में पंचायत की गई थी। वहीं बीजेपी के लोकल विधायक ने आरोपियों के पक्ष में पंचायत की थी। वहीं दूसरी तरफ देश के तमाम बड़े मीडिया चैनल भी दोषियों को बचाते नजर आ रहे थे। वो पीड़िता के परिवार पर ही सवाल उठा रहे थे।

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