भारत में माता-पिता बच्चों पर आने वाले खर्च में कोई कटौती नहीं करते ऐसे में हर माता-पिता चाहते है की वे ऐसी योजना में निवेश करें जिससे अच्छा रिटर्न्स मिले।
केंद्र सरकार की ओर से चलाई गई सुकन्या समृद्धि योजना बेहज लोकप्रिय है जो बेटियों के सुरक्षित भविष्य के लिए बनाई गई है। साथ ही पब्लिक प्रोविडेन्ट फण्ड (पीपीएफ) के नियम के अनुसार माता-पिता अपने नाबालिक के नाम पर पीपीएफ खाता खोल सकते है।
ऐसे में इन दोनो योजनाओं में कौन बेहतर है इसे जाना बेहद जरूरी है।
ज्यादा रिटर्न्स के लिए सुकन्या समृद्धि योजना बढ़िया विकल्प है सुकन्या समृद्धि योजना में 7.6 प्रतिशत का ब्याज मिलता है वहीं पीपीएफ में 7.1 प्रतिशत की ब्याज दर मिलता है। ब्याज हर चार महीने पर रिवाइज्ड होता है । दोनों में से किसी एक को चुनने की बात है तो सुकन्या समृद्धि योजना को चुनना चाहिए क्योंकि इसमें पीपीएफ के मुकाबले ज्यादा रिटर्न मिलता है जबकि 15 साल तक पीपीएफ में निवेश ज्यादा बढ़िया विकल्प होगा। कमाई का एक हिस्सा पीपीएफ पर भी निवेश करना चाहिए।

हालाकिं पीपीएफ में निवेश करने पर सरकारी गारंटी के साथ आपको टैक्स में भी छूट मिलती है।

आयकर अधिनियम के सेक्शन 80सी के तहत आप 1.5 लाख तक के निवेश पर टैक्स छूट ले सकते हैं।
दोनों ही योजनाएं डाकघर द्वारा चलाई जा रही है। इसके अलावा जिन बैंकों में पब्लिक प्रोविडेंट फंड अकाउंट ओपन करने की सुविधा मिलती है, उनमें सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट खोलने की सुविधा भी है।

मेच्योरिटी की अवधि के हिसाब से पीपीएफ अकाउंट की मेच्योरिटी 15 साल की होती है, लेकिन उसे 5-5 साल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है। वहीं सुकन्या समृद्धि योजना की मेच्योरिटी तो 21 साल है, लेकिन इसमें पैरेंट्स को 14 साल ही निवेश करना होता है।
अधिकतम और न्यूनतम निवेश

पीपीएफ: इस खाते में मिनिमम और मैक्सिमम जमा करने की लिमिट 500 रुपये और 1.50 लाख है लेकिन ध्यान रखें कि अगर अभिभावक के नाम से भी पीपीएफ अकाउंट खुला है तो दोनों अकाउंट मिलाकर ही अधिकतम रकम की लिमिट मानी जाएगी। ऐसा नहीं है कि दोनों अकाउंट में 1.5 लाख सालाना जमा हो सकता है।
एसएसवाई: सुकन्या समृद्धि योजना में सालाना न्यूनतम 250 रुपये जमा किया जा सकता है। योजना के तहत सालाना कम से कम 250 रुपये और अधिकतम 1.50 लाख रुपये जमा किया जा सकता है।

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