समझौता एक्सप्रेस जो अपने आप में दो देशों के बीच के रिश्तों को बताने के लिए काफी है। एक ट्रेन जिसके बारे में अगर आप पढ़ेंगे तो काफी हद तक भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में कब-कब उतार चढ़ाव आया है उसे आसानी से समझ सकते है। दरअसल जब-जब भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तो में कोई खटास आया है तब-तब समझौता एक्सप्रेस को रोका गया है।

आज हम इस बारे में इसलिए बात कर रहे है क्योंकि समझौता एक्सप्रेस ट्रेन में 18 फरवरी 2007 को एक बम ब्लास्ट हुआ था। एक बम ब्लास्ट जिसने भारत को शर्मशार कर दिया था क्योंकि यह सब कुछ भारतीय सीमा के अंदर हो रहा था।

आज समझौता एक्सप्रेस बम ब्लास्ट कैसे हुआ था और इसकी जांच कहां तक पहुंची और किसे इसका आरोपी माना गया। उनसब चीजों पर बात करेंगे। 

18 फरवरी 2007 को भारत और पाकिस्तान के बीच चलने वाली समझौता एक्सप्रेस जिसका ट्रेन नंबर-4001 था उसमें एक विस्फोट हुआ। भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता एक्सप्रेस हफ्ते में दो दिन चलती थी।

कहानी की शुरुआत शुरू से करते हैं। 18 फरवरी 2007 का दिन और रात के 11:30 से ज्यादा हो गए थे। समझौता एक्सप्रेस अपने निर्धारित रूट पर जा रही थी। रात्रि के 11:53 पर ट्रेन पानीपत के दिवाना रेलवे स्टेशन पर पहुंचने वाली थी। सब कुछ सामान्य चल रहा था लेकिन दीवाना रेलवे स्टेशन के पास अचानक ट्रेन में एक विस्फोट हुई। विस्फोट होने के चलते ट्रेन में आग लग गई और उसमें कुल 68 लोगों की मौत हो गई। मरने वालों में अधिकतर नागरिक पाकिस्तानी थे।

18 फरवरी को रात में यह हादसा हुआ और 19 फरवरी को SIT हरियाणा पुलिस ने इस मामले को दर्ज किया। मामला आग की तरह दोनों देशों में बसे करोड़ों नागरिकों के बीच भी पहुंच गया। पाकिस्तान ने इसकी जमकर निंदा की तो वही भारत सरकार के साथ-साथ भारत की अन्य पार्टियां भी इस घटना की निंदा कर रही थी। किसी के अनुसार यह घटना सही नहीं था और ऐसे किसी भी घटना को चाहे कारण जो भी रहा हो उसे सही ठहराया भी नहीं जा सकता।

भारत और पाकिस्तान के बीच अचानक से रिश्तों में फिर से खटास आ गयी। 19 फरवरी को पुलिस में मामला दर्ज किया गया था और इसके लगभग ढाई साल बाद 29 जुलाई 2010 को यह जांच NIA को सौंपा गया। ट्रेन में धमाके के बाद दो और ऐसे सूटकेस पाए गए थे जिनके अंदर बम भरे पड़े थे। इनमें से एक को डिफ्यूज किया गया तो दूसरे को नष्ट कर दिया गया लेकिन अब जांच करने वाले अधिकारियों को एक सुराग मिल चुका था। जो सूटकेस मिला उसके बारे में पता चला कि वह मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित कोठारी मार्केट में अभिनंदन बैंक सेंटर से बनी हुई है।

जब जांच आगे बढ़ी तो पता लगा कि अभियुक्त ने 14 फरवरी 2007 को इसे खरीदा था। 14 फरवरी को उसने बैग को खरीदा था और 19 फरवरी को यह घटना हुई थी। जब जांच और आगे बढ़ी तो पता लगा कि जिन्होंने हमला किया वो देश के अलग-अलग मंदिरों पर हुए चरमपंथी हमलों से भड़के हुए थे। आगे जांच में कई लोगों का नाम भी सामने आया जिसमें स्वामी असीमानंद से लेकर सुनील जोशी, रमेश वेंकट, लोकेश शर्मा, कमल चौहान, संदीप दांगे, विष्णु पटेल सहित अन्य लोग भी शामिल थे।

जांच एजेंसी ने पंचकूला स्थित स्पेशल कोर्ट में इन अभियुक्तों को लेकर चार्जशीट भी दायर किया। इसके अलावा देश में बड़े स्तर पर पूछताछ की गई जिसमें कई राज्यों के अलग-अलग सदस्य शामिल थे। जांच में यह बात निकल कर सामने आई थी ट्रेन में बम विस्फोट का मकसद सिर्फ और सिर्फ बदला था। इस मामले में गिरफ्तार किए गए राजिंदर चौधरी, कमल चौहान और लोकेश शर्मा का नाम इसके पहले 2006 के मालेगांव ब्लास्ट में भी आ चुका था। इसके अलावा राजेंद्र चौधरी और कमल चौहान ने तो 2006 के दिसंबर में इंटरसिटी एक्सप्रेस से फर्जी नाम के साथ दिल्ली पहुंचे थे और वहां मौजूद सुरक्षा का जायजा लेकर उसी दिन वापस लौट गए थे।

इसके बाद 2007 में फिर से स्टेशन की रेकी की गई। मकसद इस बार भी वही था कि सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना। जांच में लगभग-लगभग पूरी बात सामने आ गई थी। सुरक्षाकर्मियों को इन सारी चीजों के बारे में पता चल चुका था कि किस जगह पर बम से भरे बैग को चार अलग-अलग व्यक्तियों को सौंपा गया था। किसने उस कमरे को कब से किराए पर ले रखा था। जिन चार व्यक्तियों ने बम को ट्रेन में पहुंचाया था उनमें लोकेश शर्मा, कमल चौधरी, अमित हकला जिसे रमेश वेंकट भी कहते हैं और राजिंदर चौधरी शामिल थे। इन लोगों ने बम को पूरी योजना के तहत ट्रेन तक पहुंचाया और फिर ट्रेन में ब्लास्ट हुआ जिससे 68 लोगों की जान तो गई ही लेकिन वैश्विक स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचा, शायद उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

बम फटने के बाद दोनों ही देशों के तरफ से इसकी निंदा की गई थी। इस मामले में मुख्य अभियुक्त असीमानंद को लेकर विवाद भी होता रहा है। अगस्त 2014 में मुख्य अभियुक्त स्वामी असीमानंद को जमानत मिल गई थी जांच एजेंसी ANI उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई थी। मौजूदा समय में समझौता एक्सप्रेस बंद हो चुकी है। भारत ने जब कश्मीर से धारा 370 हटाने का ऐलान किया तब बौखलाहट में पाकिस्तान की तरफ से समझौता एक्सप्रेस को बंद करने का निर्णय लिया गया था।

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