यूपी विधानसभा चुनावों (UP Election 2022) के लिए समाजवादी पार्टी ने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के साथ गठजोड़ कर लिया है. बुधवार को 20 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इसकी जानकारी दी गई. इससे पहले सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar) के साथ 1 घंटे की बैठक की थी. इसके बाद ट्विटर पर सपा-सुभासपा गठबंधन का ऐलान कर दिया गया. वहीं, ओम प्रकाश राजभर ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर मीडिया को बैठक की जानकारी दी. हालांकि, राजभर और अखिलेश दोनों की तरफ से ये साफ नहीं किया गया है कि गठबंधन के तहत किसे, कितनी सीटें चुनाव लड़ने के लिए मिलेंगी. फिलहाल तो सपा का ये ट्वीट देखिए जिसमें पार्टी कह रही है,

वंचितों, शोषितों, पिछड़ों, दलितों, महिलाओं, किसानों, नौजवानों, हर कमजोर वर्ग की लड़ाई समाजवादी पार्टी और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी मिलकर लड़ेंगे… सपा और सुभासपा आए साथ, यूपी में भाजपा साफ!

 

वहीं, ओमप्रकाश राजभर की बात करें तो उन्होंने प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा,

“अखिलेश जी ने कहा कि बीजेपी नफरत की राजनीति कर रही है, बेरोजगार परेशान हैं. उन्होंने कहा कि साथ मिलकर चुनाव लड़ा जाए. बीजेपी को खत्म करने और सत्ता से बेदखल करने के लिए हम लोग साथ आए हैं. मैंने अखिलेश जी को मऊ में 27 अक्टूबर को होने वाली बड़ी महापंचायत रैली में बुलाया है.”

आगे बोलते हुए सुभासपा चीफ गठबंधन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता भी जता गए. बड़ा दावा करते हुए उन्होंने कहा,

“8 महीने से सब पूछ रहे थे कि राजभर किधर, तो आज मैंने बता दिया कि राजभर किधर हैं. सीटों का कोई झगड़ा नहीं है, अगर वो (सपा) एक सीट भी नहीं देंगे तो भी हमारा उनको समर्थन रहेगा.”

सुभासपा के 4 विधायक हैं

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं. इनमें से केवल 4 सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की हैं. यानी यूपी में सुभासपा के केवल 4 विधायक हैं. 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी के साथ रही सुभासपा ने 8 सीटों पर चुनाव लड़ा था. तब पार्टी ने पूरे प्रदेश में कुल 0.7 प्रतिशत वोट हासिल किए थे. अध्यक्ष ओम प्रकाश ने ग़ाज़ीपुर ज़िले की ज़हूराबाद सीट से चुनाव लड़ा था. 18 हज़ार से भी ज़्यादा वोटों से जीतने के बाद राजभर को मंत्रिमंडल में पिछड़ी जातियों के मंत्री का पद दिया गया था.

लेकिन ये साथ ज़्यादा लंबा नहीं चला. साल 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ये गठबंधन टूट गया. इसकी वजह ये थी कि बीजेपी ने सुभासपा को सिर्फ़ एक सीट से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया था, वो भी बिना उनके चुनाव चिह्न के. इस प्रस्ताव को सुभासपा ने ठुकरा दिया. 13 अप्रैल 2019 को ओम प्रकाश राजभर ने मंत्रीपद से इस्तीफ़ा दे दिया. सुभासपा ने बीजेपी के ख़िलाफ़ कुल 39 सीटों पर चुनाव लड़ा, हालांकि एक पर भी जीत हासिल नहीं हुई. इसके अलावा जिन सीटों पर सुभासपा ने चुनाव नहीं लड़ा था उन पर बीजेपी के ख़िलाफ़ प्रचार किया था. हालांकि 70 से ज्यादा सीटें जीतकर बीजेपी ने बता दिया कि इसका कोई खास असर हुआ नहीं.

पूर्वांचल में राजभर समाज की आबादी निर्णायक है

पूर्वी उत्तर प्रदेश यानी पूर्वांचल के इलाक़े में राजभर समाज का काफी प्रभाव है. माना जाता है कि यहां की करीब 100 विधानसभा सीटों पर इस समाज का खासा प्रभाव है. पूर्वांचल इलाक़े में राजभर समाज की कुल आबादी क़रीब 17-18 प्रतिशत है. बलिया, ग़ाज़ीपुर, मऊ, वाराणसी, अंबेडकर नगर में पार्टी का निर्णायक प्रभाव है. ऐसे में सपा को इसका कुछ फ़ायदा हो सकता है. उदाहरण के लिए अपना दल (सोनेलाल) और निषाद पार्टी से गठजोड़ का फ़ायदा बीजेपी को 2014 से लगातार मिलता रहा है. बता दें कि सुभासपा लगातार राजभर समाज को अनुसूचित जाति में शामिल करने की मांग उठाती रही है. फ़िलहाल यूपी में ये ओबीसी श्रेणी में आता है.

इससे पहले सुभासपा का अन्य पार्टियों के साथ गठबंधन का रोचक इतिहास रहा है. 2009 की लोकसभा चुनावों में पार्टी ने अपना दल के साथ गठबंधन किया था. वहीं, 2014 के लोकसभा चुनावों के लिए सुभासपा ने यूपी की 30 छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करके “एकता मंच” बनाया था, लेकिन दोनों ही बार सुभासपा को कोई कामयाबी नहीं मिली थी. साल 2020 में बिहार के विधानसभा चुनावों में सुभासपा का गठबंधन राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, बसपा और AIMIM से था.

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