देश में चल रहे कृषि आंदोलन के बीच राष्ट्रीय  लोक समता पार्टी ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार किसानों के साथ नहीं बल्कि पूंजीपतियों के साथ खड़ी है। रालोसपा के किसान चौपाल में पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों की जानकारी किसानों को दी और बताया कि ये कानून किसान और जन विरोधी हैं. इससे न तो किसानों का भला होगा और न ही आम लोगों का. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता फजल इमाम मल्लिक ने पार्टी कार्यालय में पत्रकारों को यह बात बताई. उन्होंने कहा कि अब तक बिहार में पांच हजार के आसपास किसान चौपाल लगाई जा चटुकी है. किसान संगठनों और किसान आंदोलन के समर्थन में किसान चौपाल दो फरवरी से शुरू हुई थी और 28 फरवरी तक यह कार्यक्रम चलेगा. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अंगद कुशवाहा, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष संतोष कुशवाहा, पूर्व प्रत्याशी बांका कौशल सिंह, प्रदेश महासचिव राजदेव सिंह, कार्यालय प्रभारी अशोक कुशवाहा, संगठन सचिव विनोद कुमार पप्पू, सचिव राजेश कुमार,कलीम इद्रिशी, सतीश कुशवाहा, पार्टी नेता पप्पू मेहता भी इस मौके पर मौजूद थे.

किसान चौपाल में अब मांग उठने लगी है कि केंद्र सरकार इन कानूनों को वापस ले और किसानों के फायदे वाला कानून लाए. किसान चौपाल के अठारहवें दिन बिहार के कई जिलों के गांवों में किसानों ने अपने मन की बात कही और साफ किया कि वे केंद्र के कानूनों में संशोधनों के पक्षधर नहीं हैं बल्कि वे इन कानूनों को वापस लेने के पक्ष में हैं. किसानों ने न्यूतम समर्थन मूल्य पर कानून बनाए जाने पर भी जोर दिया, रालोसपा नेताओं ने बताया कि बिहार के किसान मंडी व्यवस्था फिर से लागू करने की बात भी कर रहे हैं ताकि उनके उत्पादों की बेहतर कीमत मिल सके. किसानों ने कहा कि अगर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून बनता है तो उससे बिहार के किसानों को भी फायदा होगा.

कृषि बिल काला कानून है

किसान चौपाल की जानकारी देते हुए पार्टी नेताओं ने कहा कि किसान चौपाल के जरिए पार्टी किसानों तक इन कानूनों की खामियों को बताने में कामयाब हो रही है. मल्लिक ने बताया कि इन कृषि कानूनों में सफेद कुछ भी नहीं है, सच तो यह है कि पूरा कानून ही काला है और यह अगर पूरी तरह लागू हो गया तो किसान अपने खेतों में ही मजदूरी करने के लिए मजबूर हो जाएगा. रालोसपा की किसान चौपाल बुधवार को बक्सर, अरवल, बांका व मोतिहारी जिलों में लगाई गई.

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