दिल्ली-यूपी को जोड़ने वाला ग़ाज़ीपुर बॉर्डर. 28 जनवरी की शाम का वक्त था. घिरती शाम के साथ यूपी पुलिस के जवान भी भारी तादाद में जुटने लगे. लाठियों, हथियारों से लैस. न्यूज़ चैनलों पर ख़बर चलने लगी कि 28-29 जनवरी की दरम्यानी रात ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर कुछ भी हो सकता है. ये भी ख़बरें फ़्लैश होने लगीं कि यूपी सरकार ने प्रदेश भर के ज़िलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को फरमान जारी कर दिया है कि जगह-जगह से किसानों का धरना ख़त्म कराएं. ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर जो हो रहा था, वो सब इसी क़वायद का हिस्सा माना गया. लेकिन अचानक एक ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसके बाद हालात बदलते नजर आने लगे.

पुलिस से बातचीत के बाद मंच पर चढ़े राकेश टिकैत (इंडिया टुडे)

ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर किसानों के साथ मौजूद भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत से पुलिस अधिकारियों ने बात की. फिर राकेश टिकैत मंच पर चढ़े. लोगों को लगने लगा कि टिकैत अब आत्मसमर्पण करने या आंदोलन ख़त्म करने की घोषणा कर देंगे. लेकिन नहीं. टिकैत ने स्टोरी को ट्विस्ट कर दिया. कह दिया कि आत्मसमर्पण नहीं करेंगे. पुलिस चाहे तो उन्हें गिरफ़्तार कर ले, लेकिन पक्की काग़ज़ी कार्रवाई के बाद. टिकैत ने कहा,

“अगर गिरफ़्तारी देनी होगी तो हम शांति से पूरी कार्रवाई के बाद गिरफ़्तारी देंगे. लेकिन लग रहा है कि लौटते आंदोलनकारियों के साथ हिंसा की तैयारी है. और ऐसा कोई प्लान है तो मैं यहीं रहूंगा. मैं पुलिस की गोली का सामना करूंगा.”

इधर पुलिसकर्मियों की संख्या बढ़ती जा रही थी. किसी भी वक़्त लाठीचार्ज होने की आशंका जतायी जा रही थी. सस्पेन्स बना हुआ था. लेकिन उसी समय कुछ ऐसा हुआ कि यूपी पुलिस का पूरा महकमा सकते में आ गया. टीवी पर राकेश टिकैत रोते हुए देखे गए. फूट-फूटकर रो रहे थे. कह रहे थे कि मैं आत्महत्या कर लूंगा, लेकिन आंदोलन को ख़त्म नहीं करूंगा. भावुक होते हुए टिकैत ने कहा, 

”यहां अत्याचार हो रहा है, लेकिन हमारा आंदोलन जारी रहेगा. ये कानून वापस होंगे. यदि ये कानून वापस नहीं हुए तो राकेश टिकैत आत्महत्या करेगा.’’

टिकैत ने बड़े आरोप लगाए. कहा कि किसानों को मारने की कोशिश की जा रही है. स्थानीय बीजेपी विधायकों पर भी आरोप लगाया कि वो 300 लोगों के साथ लाठी-डंडे लेकर आए हैं. 

ख़बरें बताती हैं कि टिकैत के इस भावुक बयान के बाद यूपी पुलिस ने अपनी तैयारी समेट ली. पुलिस के वाहनों में लाठी-डंडे वापिस भर दिए गए. जवान फिर से गाड़ियों में बैठ गए. और चले गए. बैरंग. बिना किसी कार्रवाई के. 

क्या बस रोने की वजह से पुलिस ने क़दम वापिस खींच लिए?

ऐसा नहीं था. लेकिन टिकैत के आंसुओं को देखकर पश्चिमी यूपी के कई जिलों से किसान ग़ाज़ीपुर बॉर्डर की ओर रात में ही रवाना हो गए. मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव में राकेश टिकैत के घर पर हज़ारों की संख्या में किसान पहुंच गए. राकेश के भाई नरेश टिकैत, जिन्होंने कुछ ही घंटों पहले कहा था कि पुलिस की लाठी खाने से अच्छा है कि धरनास्थल से हट जाना— उन्होंने भी नया सिग्नल दे दिया. कह दिया कि 29 जनवरी को मुज़फ़्फ़रनगर में महापंचायत होगी. नरेश ख़ुद पश्चिमी यूपी की क़द्दावर बालियान खाप पंचायत के नेता भी हैं. 

तब तक ख़बर भी उड़ने लगी थी कि भाई-भाई में फूट पड़ गयी. लेकिन ऐसा नहीं था. सारे कन्फ़्यूजन के बीच राष्ट्रीय लोक दल के नेता जयंत चौधरी ने ट्विटर पर लिखा कि उनके पिता यानी चौधरी अजीत सिंह ने राकेश और नरेश टिकैत से बात की है, और उनसे एकजुट रहने की अपील की है. कन्फ़्यूजन दूर हो गया.

ख़बरें बताती हैं कि राकेश टिकैत की भावुक अपील के बाद ग़ाज़ियाबाद के आसपास के जिलों के किसान ट्रैक्टरों में भरकर ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पहुंचने लगे. बीकेयू नेताओं के आह्वान पर गुरुवार रात ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश से करीब 500 किसान विरोध स्थल पर पहुंच गए. 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली के दौरान दिल्ली में हिंसा के बाद कई आंदोलनकारी प्रदर्शनस्थल छोड़कर चले गए थे. उनमें से कई फिर से वापस पहुंच गए. इसी बीच महापंचायत का ऐलान कर दिया गया, जो शुक्रवार को होगी.

प्रदर्शनकारियों का दावा था कि गुरुवार शाम से ही विरोध स्थल पर लगातार बिजली कटौती हो रही थी, बुधवार से टैंकरों में पानी की सप्लाई नहीं की जा रही थी. पोर्टेबल शौचालय भी हटवा दिए जाने के आरोप लगने लगे. गुरुवार रात करीब साढ़े 10 बजे राकेश टिकैत की जांच करने डॉक्टरों की एक टीम आयी. इस समय टिकैत ने कहा कि मैं अब पानी नहीं पीऊंगा. मैं केवल वही पानी पीऊंगा जो गांवों से किसानों द्वारा लाया गया है,

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