राज्य में कला विश्वविद्यालय की स्थापना को लेकर कला संस्कृति विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है। जल्द इसकी शेष प्रक्रियाएं पूरी होने के आसार हैं। सबकुछ ठीक रहा तो बिहार में कला विश्वविद्यालय खोलने का प्रस्ताव बिहार विधानसभा के 19 फरवरी से आहूत बजट सत्र में लाया जाएगा। विधानमंडल की मुहर लगने के बाद विभाग इसे जमीन पर उतारने की दिशा में अग्रसर होगा।

कला संस्कृति विभाग के प्रधान सचिव रवि परमार ने पूछे जाने पर रविवार को कला विश्वविद्यालय का ड्रॉफ्ट तैयार हो जाने की जानकारी दी। विभाग की ओर से अब इसे विधि विभाग को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, उसके बाद राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी ली जाएगी। हालांकि इसके पहले शीर्ष स्तर पर कला विश्वविद्यालय को लेकर प्रस्ताव का प्रजेंटेशन होगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार या मुख्य सचिव दीपक कुमार के समक्ष प्रस्तुति और उनके सुझावों के अनुरूप प्रस्ताव में फेरबदल कर पुख्ता कर इसे विधि विभाग भेजा जाएगा। प्रधान सचिव ने कहा कि बिहार कला विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद इस विश्वविद्यालय में प्रदर्शनकारी (परफॉरमिंग) और प्रदर्श (विजुअल आर्ट) कला विधाओं की पढ़ाई होगी। इसके साथ ही संगीत, नाटक, नृत्य, पेंटिंग समेत अन्य विधाओं में कार्यरत संस्थानों को सम्बद्धता के लिए राज्य के बाहर के किसी विश्वविद्यालय के सामने चिरौरी नहीं करनी पड़ेगी। उन्हें बिहार कला विश्वविद्यालय से न सिर्फ सम्बद्धता (एफिलिएशन) मिल सकेगा बल्कि यह विश्वविद्यालय कला विषयों में परीक्षा का संचालन कराकर डिग्रियों का भी वितरण करेगा।

गौर हो कि तत्कालीन कला संस्कृति मंत्री मंगल पांडेय ने बिहार कला पुरस्कार प्रदान करने के दौरान 30 जनवरी 2021 को कला विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की थी। इसके बाद ही विभाग ने विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को तैयार करने पर काम आरंभ कर दिया था। प्रधान सचिव रवि परमार ने रविवार को बताया कि वर्तमान कला संस्कृति मंत्री आलोक रंजन के साथ भी इसको लेकर विमर्श किया गया है और उसके बाद विवि के ड्रॉफ्ट को ठोस रूप दिया गया है।

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