असम के गोलपारा के रहने वाले 33 साल के बबलू राभा ने बीती 31 मार्च को अपनी पत्नी से फोन पर बात कर 5 अप्रैल को घर आने का वादा किया था. उन्हें असम विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान में अपना वोट डालने के लिए भी घर आना था. लेकिन देश की सुरक्षा में तैनात इस CRPF और उसके परिवार को अंदाजा नहीं था कि वो 5 तारीख को घर तो पहुंचेगा, मगर वोट डालने के लिए नहीं अपनी अंतिम यात्रा के लिए. रविवार (4 अप्रैल) को छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में 22 जवान शहीद हो गए थे. उनमें बबलू राभा भी शामिल थे. वे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की 210वीं कोबरा बटालियन में तैनात थे. बबलू ने 2009 में CRPF की ये टॉप यूनिट जॉइन की थी.

पार्थिव शरीर के साथ लौटे घर

सोमवार (5 अप्रैल) को जब बबलू राभा का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव पहुंचा तो हर तरफ शोक छा गया. उनके परिवार में बीमार मां, पत्नी और 7 साल की बेटी है. बबलू अपने घर में अकेले कमाने वाले थे. उनके जाने के बाद परिवार ने अपना वो सहारा खो दिया है. बबलू पिछले दिसंबर घर आए थे. तब उन्होंने घर बनवाना शुरू किया था. वो काम भी अधूरा रह गया. अब उनके एक रिश्तेदार जिबिन राभा का कहना है कि बबलू ने देश की सुरक्षा में अपने प्राण दे दिए, इसलिए सरकार को शहीद के परिवार के बारे में सोचना चाहिए.

बबलू के अलावा असम के एक और सपूत दिलीप कुमार दास भी इस हमले में शहीद हो गए. 40 साल के दिलीप भी कोबरा बटालियन में तैनात थे. वो 2011 में CRPF में शामिल हुए थे. दिलीप के परिवार में उनके माता-पिता, पत्नी और दो बेटियां हैं.

Bablu Rabha
शहीद बबलू राभा. (तस्वीर- हेमंत कुमार नाथ, आजतक)

शाह और बघेल ने दी श्रद्धांजलि

सोमवार को ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीजापुर नक्सली हमले के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी. इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत में अमित शाह ने कहा कि शहीदों की कुर्बानी बेकार नहीं जाएगी. आजतक से जुड़े धर्मेंद्र महापात्रा की रिपोर्ट के मुताबिक, शाह ने कहा,

‘मैं देश को और शहीदों के परिजनों को आश्वस्त करता हूं कि उनकी शहादत व्यर्थ नहीं होगी. पिछले कुछ सालों में नक्सलियों के खिलाफ लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने इसे और आगे बढ़ा दिया है.’

गृह मंत्री शाह ने बताया कि उन्होंने सीएम भूपेश बघेल और फोर्स के अफसरों के साथ समीक्षा बैठक की है. उनके मुताबिक, मीटिंग में सुरक्षा बलों के अधिकारियों ने सुझाव दिया कि इस लड़ाई की गति किसी भी तरह से कम ना होने दिया जाए. शाह ने कहा,

‘इससे पता चलता है कि जवानों का हौसला कम नहीं है. मैं देश को आश्वस्त करता हूं कि ये लड़ाई रुकेगी नहीं, बल्कि और गति के साथ आगे बढ़ेगी. हम इसे अंजाम तक लेकर जाएंगे. अंत में नक्सलवादियों के खिलाफ हमारी विजय निश्चित है. पिछले 5 से 6 साल के अंदर जितने कैंप अंदर स्थापित करने थे, उसमें हमें सफलता मिली है. इसी झुंझलाहट में ऐसी घटनाएं सामने आती हैं.’

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अमित शाह और भूपेश बघेल. (तस्वीर- धर्मेंद्र महापात्रा, आजतक)

वहीं, सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि जवानों ने बहुत बहादुरी से नक्सलियों से ‘युद्ध’ किया. उन्होंने कहा,

‘इस एनकाउंटर में बड़ी संख्या में नक्सली मारे गए हैं. दो-चार दिन में ये संख्या सामने आ जाएगी. जहां मुठभेड़ हुई, वो नक्सलियों का गढ़ माना जाता है. नक्सली बौखलाहट में ऐसे कदम उठा रहे हैं. जल्दी ही दूसरे इलाकों में कैंप खोले जाएंगे. नक्सली सीमित दायरे में सिमट गए हैं. आगे भी ऐसे ऑपरेशन होते रहेंगे. केंद्र के साथ पूरे समन्वय के साथ काम हो रहा है.’

बता दें कि रविवार को छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़ हो गई थी. इसमें देश ने अपने 22 जवान खो दिए. कई अन्य जवान घायल हुए हैं. वहीं, एक जवान के नक्सलियों के कब्जे में होने की खबर है. उसकी तलाश की जा रही है. रिपोर्टों के मुताबिक, शहीद जवानों में DRG के 8, STF के 6, COBRA बटालियन के 7 और बस्तर बटालियन का 1 जवान शामिल है.

Source – Lallantop

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