कभी विश्व कप की मेजबानी करने वाले पटना का मोइनुल हक स्टेडियम किस बदहाली के दौर से गुजर रहा है इसके बारे में तो पूरे बिहार को पता ही है। बिहार में खिलाड़ियों को सुविधा के नाम पर सरकार के तरफ से केवल कागजी सहूलियत मिलती है। यहां कागज पर सैकड़ों स्टेडियम बनकर तैयार हो जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही होती है। हालांकि इस बार मोइनुल हक स्टेडियम को लेकर एक सकारात्मक खबर आयी है जिसके बारे में हम आपको आगे बतायेंगे।

मोइनुल हक स्टेडियम

बिहार सरकार के मंत्री मंगल पांडेय राजेंद्र सिंह मेमोरियल वीमेंस प्रीमियर लीग के उद्घाटन में ऊर्जा स्टेडियम पहुंचे थे। मंगल पांडेय के पास बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ कला संस्कृति, युवा एवं खेल मंत्रालय का भी अतिरिक्त प्रभार है इसलिए उन्हें उद्घाटन के मौके पर बुलाया गया था। उन्होंने ऊर्जा स्टेडियम में पत्रकारों से भी बातचीत किया।

महिला खिलाड़ी से बातचीत करते मंगल पांडे

मंगल पांडे ने वहां बताया कि सरकार खेल और खिलाड़ियों को लेकर कितनी गंभीर है और कितनी गंभीरता से खेल के विकास के लिए काम करने की योजना बना रही है। उन्होंने बताया कि सरकार 400 करोड़ के लागत से मोइनुल हक स्टेडियम के विकास का योजना बना चुकी है। मंगल पांडे ने बताया कि 400 करोड़ रुपयों की लागत से मोइनुल हक स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर का स्टेडियम बनाने के लिए विकसित किया जाएगा।

आगे उन्होंने बात करते हुए बताया कि स्टेडियम के अंदर वह सारी सुविधाएं मौजूद होंगी जो एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम में मौजूद होती है। मंगल पांडे ने कहा कि कैंपस के अंदर ही फाइव स्टार होटल बनाया जाएगा। खिलाड़ियों की प्रैक्टिस के लिए ग्राउंड में कुल 9 पिच बनाए जाएंगे। पवेलियन को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाया जाएगा। यह सब कुछ मंगल पांडे राजेंद्र सिंह मेमोरियल वीमेंस(महिला) प्रीमियर लीग के उद्घाटन के दौरान बोल रहे थे।

आगे उन्होंने बात करते हुए कहा कि 10 दिन में डिजाइन बनकर आ जाएगा। जैसे ही डिजाइन बन कर आ जाएगा उसके बाद सरकार आगे की कार्यवाही भी शुरू कर देगी। मंगल पांडे ने बताया कि स्टेडियम को तैयार करने के लिए और उसको किस प्रकार से तैयार किया जाए इसके लिए भाजपा सांसद और पूर्व में भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रहे गौतम गंभीर से भी बातचीत की जा रही है। गौतम गंभीर के अलावा भी अन्य कई ऐसे लोग जो स्टेडियम, पिच और क्रिकेट से जुड़ी जानकारी रखते हैं उनसे भी तमाम तरह के सुझाव लिए जा रहे हैं। उन्होंने कार्ययोजना की खाका रखते हुए बताया कि ग्राउंड बलुआही मिट्टी पर डेवेलोप किया जाएगा। इस प्रकार की घास को लगाया जाएगा जो साल भर हरे-भरे रहते है। इसके अलावा इसे वर्ल्ड लेवल स्टेडियम बनाने के लिए जो भी हो सकता है उसे किया जाएगा।

आगे मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि बिहार सरकार हर जिले में खेल और खिलाड़ियों के विकास को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है। खेलो इंडिया के तहत अलग-अलग प्रकार के खेलों के लिए भारत सरकार के तरफ से बिहार को 70 करोड़ रुपये मिले है। इस पैसों को हर जिले में खेल और खिलाड़ियों के विकास पर खर्च किया जाना है।

आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि खेलो इंडिया एक ऐसा अभियान या फिर कार्यक्रम है जिसके तहत भारत सरकार खेल को लेकर भारत के बच्चों और युवाओं को जागरूक करना चाहती है और उनको खेल से जोड़ना चाहती है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत 16 विभिन्न प्रकार के खेलों का चयन किया गया है। इस अभियान के जरिए 10 से 18 आयु वर्ग के खिलाड़ी आवेदन भी कर सकते है। भारत सरकार उनका उनके प्रदर्शन के अनुसार चयन करेगी और फिर उन्हें उस खेल के लिए तैयार किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात है की चयन होने के बाद भी बच्चों की जो दैनिक पढ़ाई होती है वो चलती रहेगी। जो बच्चा खेलो इंडिया का हिस्सा होगा उसको वार्षिक अनुदान के तौर पर भारत सरकार 5 लाख रुपया देगी जो उसे अपने खेल को और अधिक निखारने के लिए खर्च करने होंगे।

इसमें चयन के लिए खेलो इंडिया के ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर आपको रजिस्ट्रेशन करना होगा। भारत सरकार 5 लाख रुपयों का जो वार्षिक अनुदान देगी वह चयन होने के अगले 8 साल तक मिलता रहेगा। इसके अलावा सरकार की तरफ से बच्चों को वह सारी सुविधाएं दी जाती है जिसके चलते उनकी प्रतिभा और अधिक निखर सकें।

तो यह जानकारी खेलो इंडिया कार्यक्रम के बारे में थी, अब हम वापस आते हैं मोइनुल हक स्टेडियम पर।

जिस स्टेडियम को अब विकसित किए जाने की बात मंत्री साहब कर रहे हैं उस योजना को पिछले 6 साल से बनाई जा रही है। अब जो नई योजना बनाई गई है उसके अनुसार स्टेडियम की लंबाई और चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। क्रिकेट के अलावा हॉकी, फुटबॉल, वॉलीबाल, लॉन टेनिस, एथलेटिक्स व अन्य प्रकार के टूर्नामेंट के आयोजन और प्रैक्टिस की व्यवस्था भी की जाएगी। इसे एक मल्टीपर्पस ग्राउंड के अनुसार अंतरराष्ट्रीय मानक का ध्यान रखते हुए तैयार किया जाएगा।

अब आपको स्टेडियम की मौजूदा स्थिति कैसी है उसके बारे में जान लेना चाहिए।

जो स्टेडियम कभी अंतरराष्ट्रीय मैच की अगवानी कर चुका है आज उसका कोई भी हिस्सा ठीक नहीं है। पिच, पवेलियन, ग्राउंड सब कुछ तहस-नहस हो चुका है। दर्शकों से कभी खचाखच भरी रहने वाली दर्शक दीर्घा की दीवाल कब गिर जाए इसका कोई ठिकाना नहीं है। कोरोना के पहले फरवरी 2020 में बिहार रणजी ट्रॉफी प्लेट ग्रुप के मैच यहां हुए थे। उसके बाद लॉकडाउन के दौरान पूरा ग्राउंड झाड़ियों से पट गया। लॉकडाउन जब खत्म हुआ तो बिहार क्रिकेट एसोसिएशन ने इस स्टेडियम को मार्च महीने तक के लिए अलॉट कराया तो साफ-सफाई कराई गई। फिलहाल अपनी बदहाली के दौर से गुजर रहा मोइनुल हक स्टेडियम अपने सुनहरे दिनों को याद कर रहा है।

हालांकि सरकार जब तक इसका धरातल पर कायाकल्प नहीं करती है तब तक कुछ भी कहना जल्दबाजी ही होगी। हमें बिहार का वह बहुचर्चित स्टेडियम घोटाला तो याद ही होगा जिसमें कागजों पर 100 स्टेडियम बना हुआ दिखा दिया गया था लेकिन जमीन पर कुछ काम हुआ ही नहीं था। यह घोटाला भी नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री काल के दौरान का ही है। कई ऐसी जगह जहां 45 लाख-50 लाख रुपयों की लागत से स्टेडियम बनाने का दावा किया गया था वहां स्टेडियम के नाम पर सिर्फ कुछ सीढ़िया बनाई गई थी। हमने इसे इसलिए बताया क्योंकि जब तक काम धरातल पर सही तरीके से उतर नहीं जाता तब तक कुछ भी मान लेना गलत होगा।

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