रिलायंस ने पिछले दिनों पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में अपनी सब्सिडरी जियो इंफोकॉम (Jio Infocom) के जरिये दायर याचिका में कहा है कि नए तीन कृषि कानूनों से कंपनी का कोई लेना-देना नहीं है। कंपनी ने यह भी कहा है कि नए कृषि कानून किसी भी तरह से उन्हें कोई लाभ नहीं पहुंचाता है। कोर्ट में रिलायंस ने कहा है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड, रिलायंस रिटेल लिमिटेड (RRL), रिलायंस जियो इंफोकॉम लिमिटेड (RJIL) और रिलायंस से जुड़ी कोई भी अन्य कंपनी न तो कॉरपोरेट या कॉन्ट्रैक्ट फ़ार्मिंग करती है और न ही करवाती है। और न ही इस बिजनेस में उतरने की कंपनी की कोई योजना है।

क्या कहना है रिलायंस का

कंपनी के बयान के अनुसार “कॉर्पोरेट” या “कॉन्ट्रैक्ट” खेती हेतू रिलायंस या रिलायंस की सहायक किसी भी कंपनी ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती की कोई भी जमीन हरियाणा/पंजाब अथवा देश के किसी दूसरे हिस्से नहीं खरीदी है। न ही ऐसा करने की उनकी कोई योजना है। रिलायंस ने कोर्ट को यह भी बताया है कि रिलायंस रिटेल संगठित रिटेल सेक्टर की कंपनी है और विभिन्न कंपनियों के अलग अलग प्रोडक्ट बेचती है पर कंपनी किसानों से सीधे खाद्यान्नों की खरीद नही करती और न ही किसानों के साथ कोई दीर्घकालीन खरीद अनुबंध में कंपनी शामिल है।

रिलायंस फ्रेश और​ जियोमार्ट में बिकते हैं कृषि उत्पाद?

यदि आलू, प्याज, टमाटर जैसी सब्जी, गोभी, मटर, भिंडी, करेला आदि जैसी मौसमी सब्जी और संतरा, सेब, कीनू, नाशपाती आदि को आप कृषि उत्पाद मानते हैं तो ये उत्पाद रिलायंस के स्वामित्व वाले वेंचर रिलायंस फ्रेश और जियोमार्ट में मिलते हैं। कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि ये उत्पाद कैश क्रॉप हैं। इनका एमएसपी तय नहीं होता। कहा जाए तो इनका नए कृषि कानूनों से संबंध नहीं है। कंपनी किसानों को उचित कीमत देकर सीधे फल-सब्जी खरीदती है।

किसानों और ग्राहकों का फायदा

रिलायंस के अधिकारी बताते हैं कि इन कृषि उत्पादों को स्टोर में बेचने का एक ही मकसद होता है, किसानों और ग्राहकों का फायदा। इससे किसानों को हरी सब्जियों और फलों का उचित दाम मिलता है और ग्राहकों को ताजी सब्जी बाजार से कम कीमत पर मिल जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि इस प्रक्रिया में बिचौलिए हट जाते हैं। बिचौलिए किस तरह से किसानों का शोषण करते हैं, यह किसी से छुपा नहीं है।

किसानों को बताया है अन्नदाता

रिलायंस ने 130 करोड़ भारतीयों का पेट भरने वाले किसान को अन्नदाता बताया है। साथ ही किसान की समृद्धि और सशक्तिकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता भी जाहिर की है। किसानों में फैली गलतफहमियां दूर करते हुए रिलायंस ने कोर्ट को बताया है कि वे और उनके आपूर्तिकर्ता, समर्थन मूल्य (MSP) या तयशुदा सरकारी मूल्य पर ही किसानों से खरीद पर जोर देंगे। ताकि किसान को उसकी उपज का बेहतरीन मूल्य मिल सके।

रिलायंस के खिलाफ अभियान


रिलायंस का आरोप है कि जियो टावर में तोड़फोड़ के लिए उपद्रवियों को निहित स्वार्थ के कारण उकसाया जा रहा है। किसान आंदोलन को मोहरा बनाकर रिलायंस के खिलाफ लगातार एक कुटिल, दुर्भावनायुक्त और विद्वेषपूर्ण अभियान चलाया गया है। कृषि कानूनों से रिलायंस का नाम जोड़ने का एकमात्र उद्देश्य उनके कारोबार को नुकसान पहुंचाना और कंपनी की प्रतिष्ठा को तहस-नहस करना है।
source – NV Times

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