बिहार में सरकार गठन के 2 महीने से ज्यादा का समय हो गया है लेकिन बिहार की राजनीतिक सरगर्मी शांत होने का नाम नहीं ले रही है। खरमास की भी समाप्ति हो गई है लेकिन अभी भी मंत्रिमंडल विस्तार की कोई संभावना दूर तलक नजर नहीं आ रही है । हालाकि इन तमाम अटकलों के बीच बीजेपी ने बिहार में होने वाले विधान परिषद उप चुनाव के लिए अपने प्रत्याशी की घोषणा कर दी है । बीजेपी ने विधान परिषद सीट अल्पसंख्यक समाज को दिया है और शाहनवाज़ के नाम पर शीर्ष नेतृत्व ने अपनी मोहर लगा दी हैं।

विधान परिषद के बहाने मुस्लिम समुदाय को साधने की कोशिश

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में केंद्रीय नागरिक तथा उड्डयन मंत्री शहनवाज हुसैन को बिहार में लाकर पार्टी मुस्लिम वोटर्स को अपनी ओर लाना चाहती है। शहनवाज हुसैन ने लंबे समय तक केंद्र की राजनीति में दांव खेला है लेकिन पार्टी उन्हें प्रदेश में लाने का मन बना चुकी है। यह बताया जा रहा है विधान परिषद में चुने जाने के पश्चात उन्हें बिहार सरकार में बड़ी जिम्मेदारी भी दी जा सकती है। क्योंकि उनके नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी ने जम्मू कश्मीर में बड़ी विजय प्राप्त की है।

स्वच्छ और साफ सुथरे छवि के नेता है 

शाहनवाज हुसैन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के प्रिय नेताओं में शामिल रहे थे। उन्हें बेहद शांत,सौम्य तथा ईमानदार छवि का नेता माना जाता है। उनका बेदाग राजनीतिक कैरियर और पार्टी नेतृत्व के हर फैसले पर अपनी राय रखने का हुनर उनके लिए प्रशंसा का कारण बनता है। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें विधान परिषद चुनाव का प्रत्याशी बनाकर अल्पसंख्यक समुदाय को अपनी ओर करने का संदेश दे दिया है। इस समय विधान परिषद में भाजपा का कोई भी अल्पसंख्यक चेहरा नहीं है।

वहीं अगर बिहार के राजनीतिक पंडितों की माने तो सहनावज हुसैन को एमएलसी बना कर बिहार में बीजेपी बड़ी तैयारी में लग गई है क्युकी पिछले दिनों कई दाफ्फा देखा गया है बीजेपी नेता, विधायक और सांसद सभी नीतीश कुमार पर बढ़ते अपराध को लेकर हमलावर नजर आए है । और तो और कहीं ना कहीं बिहार के जरिए बीजेपी बंगाल को साधने की कोशिश में जुटी है। बंगाल में अल्संख्यक समुदाय के लगभग 28 प्रतिसत वोट है और इसी को ध्यान में रख कर बिहार में एक बड़ा फैसला लिया गया है।

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