जैसे मुम्बई के लिए गेटवे ऑफ इंडिया, दिल्ली के लिए इंडिया गेट, आगरा के लिए ताजमहल, हैदराबाद के लिए चारमीनार है, उसी तरह पटना के लिए गोलघर है । लेकिन हालत अभी बिल्कुल अप्रशंसनीय है।
जिस गोलघर को अंगेजों ने 235 साल पहले एक लाख 20 हज़ार रुपये में महज़ दो साल के अंदर बना दिया वहीं बिहार सरकार इसमें करोङों रुपये खर्च कर के भी 10 साल से भी ज्यादा समय मे मरम्मत नहीं करवा पाई है।

सुशासन बाबू की सरकार ने 2011 में गोलघर के ऊपरी हिस्से की दीवारों में आई दरारों को भरने और जर्जर सीढ़ियों की मरम्मत का काम आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के हाथों में दिया। ऐएसआई के अनुसार , दीवार की दरारें भर दी गयी है लेकिन सीढ़ियों की मरम्मत बाकी है.
मीडिया कर्मियों से बात-चीत पर सुपरिटेंडेंट आर्कियोलॉजिस्ट एचऐ नाइक ने कहा कि सीढ़ियों का काम बाकी इसलिए है क्योंकि सरकार की तरफ से उसके लिए दी जाने वाली राशि अब तक जारी नहीं कि गई है।

जबकि बिहार सरकार के कला संस्कृति एवं युवा विभाग के प्रधान सचिव रवि परमार मीडिया कर्मियों से कहा कि “देरी ऐएसआई वालों की तरफ से हो रही है। हम उनसे पिछले डेढ़ साल से खाता नंबर मांग रहे है ताकि राशि जारी की जा सके। लेकिन वे नहीं दे रहे थे। अब जाकर जब हमारी ओर से शिकायत की गई तब उन्होंने अपने खाते की जानकारी दी है। फण्ड रिलीज प्रक्रिया में है बहुत जल्द हो जाएगा”।

वहीं दीवार के दरारों को भरने के काम से भी बिहार के संबंधित विभाग की नाराजगी है। विभाग ने ऐएसआई को पत्र लिख कर काम के प्रति असंतुष्टि जाहिर की है और एक टीम गठित कर मरम्मत कार्य की जांच करने को कहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here