हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट की घोषणा में कहा था कि दो और सरकारी बैंक का निजीकरण किया जाएगा। जिसके मध्यनजर 69 सरकारी बैंकों के 10 लाख कर्मचारी सरकार के निजीकरण के फैसले से हड़ताल पर है।

पिछले चार सालों में कई बैंकों का विलय किया गया है जिससे हजारों कर्मचारियों की नौकरियां गयी है।

मीडिया कर्मियों से बात चीत पर ऑल इंडिया बैंक एम्प्लाइज एसोसिएशन के महा सचिव सीएच वेंकटाचलम ने कहा, “उनका लक्ष्य होना चाहिए कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कैसा बनाना है. उनको किस तरह से जीवंत बनाया जा सकता है. उसमें हम सहयोग कर सकते हैं. हम उनसे बात कर सकते हैं. लेकिन सरकार निजीकरण के रास्ते पर बढ़ेगी तो लड़ाई तेज़ होगी. हमारी लड़ाई लंबी भी हो सकती है. अभी हमने दो दिनों की हड़ताल बुलाई है. इसके बाद चार दिनों की करेंगे, दस दिनों की करेंगे, बीस दिनों की करेंगे, अनिश्चितकालीन करेंगे. ऐसा हो सकता है.”

पीटीआई के एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले चार सालों में 14 सरकारी बैंकों का विलय किया गया है।

खबरों की माने तो बैंक कर्मचारी यूनियन और अधिकारियों के मामले सुलझाने के लिए मार्च के पहले और दूसरे सप्ताह में मीटिंग हुई लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल सका ।

सरकारी बैंकों के निजीकरण के मामले में एक तर्क यह भी है कि ये बैंक घाटे में जा रही है और उनके द्वारा दिया कर्ज़ भी वापस नहीं हो रहा।

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