बिहार विधान सभा में आज उस वक़्त अजीबो गरीब स्थिति उत्पन हो गया जब सदन के सभी सदस्य नीलगाय और घोड़परास के नाम पर आपस में ही भीड़ गए। दरअसल, बिहार विधानसभा में बेगूसराय के विधायक ने नीलगाय से फसल क्षति पर मुआवजा देने की मांग की। किसानों को नीलगाय की तरफ से फसल नुकसान पर कोई मुआवजा नहीं दिया जाता है।

बीजेपी विधायक के द्वारा किए गए सवाल पर जवाब देते हुए मंत्री नीरज सिंह बबलू ने कहा कि फिलहाल नीलगाय से होने वाली फसल नुकसान पर मुआवजा का कोई प्रावधान नहीं है। हालाकि सरकार इस बात पर विचार कर रही है।इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने भी नीलगाय शब्द पर आपत्ति जताई और घोड़परास या निलबकरी शब्द के इस्तेमाल की बात कही. नीलगाय और घोड़परास को लेकर काफी देर तक के सदन में बात कही होती रही।

सरकार ने सदन में कहा कि नीलगाय जंगली जानवरों की श्रेणी में आता है लेकिन इसके बावजूद अब तक इससे होने वाले फसल क्षति पर मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है।

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