राष्ट्रीय लोक समता पार्टी कृषि कानूनों को काला बताते हुए इन्हें निरस्त करने की अपनी मांग दोहराई है. रालोसपा के किसान चौपाल में पार्टी नेता किसानों को इन कानों की जानकारी देकर केंद्र सरकार के पाखंड को उजागर कर रहे हैं. राज्यव्यापी किसान चौपाल के तेरहवें दिन रालोसपा नेताओं ने किसानों से कहा कि ये कानून किसानों को सुरक्ष नहीं देते इसलिए किसान परेशान हैं. वे अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं. केंद्र सरकार के रवैये के खिलाफ किसानों में गुस्सा है. यह गुस्सा वाजिब भी है क्योंकि ये कानून किसानों के हित में नहीं है. इन कानूनों के लागू हो जाने का मतलब है कि एक बार फिर से जमींदारी प्रथा का लागू हो जाना.

पार्टी नेताओं ने कहा कि बिहार में हम इसे देख रहे हैं. मंडी व्यवस्था खत्म हो जाने से किसानों की स्थिति बेहतर नहीं हुई है. केंद्र सरकार अब इन कानूनों के जरिए किसानों को अपने खेतों में ही मजदूर बनाने पर तुली है. किसान इस बात को बेहतर तरीके से समझ रहे हैं. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता फ़ज़ल इमाम मल्लिक और प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता धीरज सिंह कुशवाहा ने यह जानकारी प्रेस कांफ्रेंस कर दिया। इन काले कानूनों की खामियों को उजागर किया और राज्य भर में चलाए जा रहे पार्टी के किसान चौपाल कार्यक्रम की जानकारी दी. दिल्ली की सीमा पर चल रहे किसानों के आंदोलन के समर्थन में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने बिहार में किसान चौपाल की शुरुआत दो फरवरी से की है. प्रेस कांफ्रेंस में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष रेखा गुप्ता, अभियान समिति के प्रदेश अध्यक्ष जीतेंद्र नाथ, महासचिव व प्रवक्ता भोला शर्मा, प्रदेश महासचिव संजय मेहता व भुवनेश्वर कुशवाहा,  किसान प्रकोष्ठ के प्रदेश प्रधान महासचिव रामशरण कुशवाहा और कार्यालय प्रभारी अशोक कुशवाहा मौजूद थे. प्रेस कांफ्रेंस में पार्टी नेताओं ने बताया कि बिहार में किसानों को जागरूक बनाने और देश भर में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में रालेसपा राज्यव्यापी किसान चौपाल कार्यक्रम चला रही है. अब तक करीब तीन हजार से ज्यादा गांवों में किसान चौपाल लगाई जा चुकी है.

दोनों नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार आम लोगों और किसानों के हित की नहीं सोच रही है बल्कि कारपोरेट घराने के लिए कारपेट बिछा रही है. मल्लिक और धीरज ने कहा कि हैरत की बात तो यह है कि सरकार ने आवश्यक वस्तुओं की परिभाषा ही बदल डाली है. आम लोगों के लिए चावल, गेंहू या तिलहन से ज्यादा जरूरी क्या चीज हो सकती है लेकिन सरकार ने इसे आवश्यक वस्तुओं की सूची से हटा कर जमाखोरी का रास्ता खोल दिया है. जाहिर है कि इसका फायदा कारपोरेट घरानों को होगा. देश में किसान इस बात को समझ रहा है. दोनों नेताओं ने कहा कि रालोसपा प्रमुख श्री उपेंद्र कुशवाहा ने इसे पूंजीपतियों बनाम किसानों के बीच की लड़ाई बताया है और किसान चौपाल में पार्टी नेता इसका जिक्र कर रहे हैं.

किसान चौपाल की जानकारी देते हुए पार्टी नेताओं ने कहा कि किसान चौपाल के जरिए पार्टी किसानों को इन कानूनों के सच उजागर करने में कामयाब हो रही है. मल्लिक और धीरज ने बताया कि इन कृषि कानूनों में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे किसानों का भला हो. ये कानून अगर पूरी तरह से लागू हो गए तो किसान अपने खेत पर ही मजदूरी करने के लिए मजबूर हो जाएगा. रालोसपा की किसान चौपाल शनिवार को गोपालगंज, वैशाली, सीतामढ़ी, पटना पूर्वी, पटना पश्चिमी व अरवल जिलों में लगाई गई. अब तक करीब 25 जिलों में चौपाल लगाई जा चुकी है. रालोसपा ने दस हजार गांवों में किसान चौपाल लगाने का लक्ष्य तो रखा ही है इसके अलावा 25 लाख किसानों तक पहुंच कर इन कानूनों की जानकारी और जागरूक बनाने का भी लक्ष्य रखा है.

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