पटना: राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह पार्टी से काफी नराज चल रहे हैं। बताया जा रहा है कि आठ दिनों से वे राजद के कार्यालय नहीं पहुंचे हैं। हालांकि तेजस्वी यादव ने जगदानंद सिंह की नाराजगी की खबरों को ख़ारिज कर दिया है, लेकिन जगदानंद सिंह के कथित अपमान पर बिहार की सियासत गर्म है। पशुपति कुमार पारस और जीतन राम मांझी के बाद अब जदयू संसदीय बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने जल्द जगदानंद सिंह से बड़ा निर्णय लेने कि अपील कि है। कुशवाहा ने कहा कि राजद में जगदानंद सिंह खुद को पीड़ित महसूस कर रहे हैं।

उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राजद में समाजवादी के नाम पर सिर्फ राजनीति कि जाती है। उन्होंने कहा कि जगदानंद सिंह से पहले रघुवंश प्रसाद सिंह का भी अपमान किया गया था। जगदा बाबू की नाराजगी तो अब सार्वजनिक रूप से प्रकट हो रही है। यह नाराजगी कोई एक दिन की बात नहीं है, अक्सर राजद में उनको बेजजती झेलनी पड़ती है। अब वह जहां हैं, वहां कितना धैर्य रख पाते हैं यह देखने वाली बात होगी। जदयू में उन्हें लेने के सवाल पर कुशवाहा ने कहा कि पहले वह राजद से निकलें फिर आगे की बात की जाएगी।

तेज प्रताप यादव द्वारा जगदानंद सिंह के अपमान किए जाने पर उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि किस संस्कार में लालू यादव जी के बच्चे पले हैं बढ़े हैं यह राजद के लोग ज्यादा जानते हैं। जब उनके बच्चे लालू प्रसाद यादव कि ही प्रतिष्ठा नहीं रखते हैं, तो और लोगों को क्या हीं देंगे? बता दें कि इससे पहले केंद्रीय मंत्री व लोजपा पारस गुट के अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस ने जगदानंद सिंह को अपनी पार्टी में आने का ऑफर दे दिया था।

बता दें कि जगदानंद सिंह की नाराजगी का कारण तेज प्रताप यादव का वह बयान बताया जा रहा है जो उन्होंने युवा राजद के एक कार्यक्रम में दिया था। तेज प्रताप ने कहा था कि लोगों को समझना चाहिए कि कुर्सी किसी की बपौती नहीं होता है। आज किसी के पास है, कल किसी और के पास होगी। कुछ लोग पार्टी के हिटलर बने हुए हैं। इस बयान के बाद से ही जगदानंद सिंह पिछले कुछ दिनों से पार्टी कार्यालय भी नहीं जा रहे हैं, जिससे उनकी नाराजगी की खबर को बल मिल रहा है।

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