बिहार में सरकारी पैसों के बंदर बाट का एक नया मामला सामने आया है, जिसके बाद राज्य की राजनीति में हड़कंप मच गया है। नया मामला बिहार के शिक्षा विभाग से जुड़ा हुआ है , जहां पर पटना के डीईओ ने जिले के 600 से अधिक के असिस्टेंट टीचर्स को अवैध तरीके से प्रमोशन देकर उनका वेतन बढ़ा दिया। सभी असिस्टेंट टीचर को इस वजह से एकमुश्त 6 से 7 लाख का फायदा पहुंचा और इस तरह राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लग गया। जी हां, मामला सामने आने के बाद अब हर माह शिक्षकों के वेतन से कटौती का आदेश जारी कर दिया गया है।

यह पूरा मामला शिक्षा विभाग के नियमों की अनदेखी कर शिक्षकों को प्रमोशन देने और उन्हें बढ़ा हुआ वेतन का लाभ देने से जुड़ा है। पटना जिले में इस मामले की जांच के लिए एक सामाजिक कार्यकर्ता गायत्री देवी ने जुलाई 2020 में प्रमंडलीय आयुक्त को आवेदन दिया था। आवेदन में आरोप था कि डीईओ ज्योति कुमार जिला कार्यक्रम पदाधिकारी स्थापना केशव कुमार और लिपिक शंभू कुमार ने 31 दिसंबर 1995 के बाद नियुक्त शिक्षकों को गलत तरीके से वरीय वेतनमान का निर्धारण कर करोड़ों रुपए की सरकारी राशि का बंदरबांट किया है। जिले के छह सौ से ज्यादा शिक्षकों को प्रथम उन्नयन ग्रेड पे 4600 देते हुए नियुक्ति से प्रशिक्षित मानकर वेतन का निर्धारण किया गया। जिसके कारण उन्हें सातवें वेतन वृद्धि का फायदा मिला और प्रत्येक शिक्षक को दो से तीन वार्षिक वेतन वृद्धि हो गई। इसके कारण इन टीचर्स की ना केवल हर महीने 7 से 8 हजार वेतन वृद्धि हुई बल्कि एक मुश्त 6 से 7 लाख का बकाया भी मिल गया।

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