काफी लंबे अरसे के इंतजार के बाद बिहार सरकार के द्वारा मंत्री मंडल का विस्तार तो कर दिया गया है लेकिन फिलहाल एनडीए मुश्किल वक़्त से गुजर रहा हैं। मंत्रिमंडल में कम भागीदारी मिलने के बाद सहयोगियों की नजर विधान परिषद की सीटों पर टिकी है।

एनडीए में शामिल जदयू, बीजेपी के अलावा हम और वीआईपी भी शामिल है। इसी बीच पूर्व सीएम जीतनराम मांझी की हम और मुकेश सहनी की वीआईपी ने एमएलसी सीटों पर दावेदारी ठोक दी है।

राज्यपाल के कोटे वाली सीट पर दावेदारी

बिहार में राज्यपाल कोटे की खाली 12 सीटों की बात करें तो इस पर कला संस्कृति, खेल, विज्ञान और समाज सेवा से जुड़ी हस्तियों को जगह मिलने वाली है. सीटों पर मनोनयन को लेकर  एनडीए में फ़िलहाल आम सहमति नहीं बन पाई है. दूसरी तरफ मांझी की हम और मुकेश सहनी की वीआईपी ने सीटों को लेकर बीजेपी और जदयू पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है. हालाकि सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक फिफ्टी-फिफ्टी फॉर्मूले पर बीजेपी-जेडीयू में सीटों का बंटवारा हो सकता है। और ख़ास बात यह है कि वीआईपी और हम को जदयू और बीजेपी के द्वारा जायदा तवाजो नहीं दी जाएगी।

आपको बता दे कि  बिहार  में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को  125 और महागठबंधन को 110 सीटें मिली थीं। हालाकि  आगे चलकर निर्दलीय विधायक सुमित सिंह ने जेडीयू को समर्थन देने की बात कही. वहीं, बसपा के एकलौते विधायक जमां खान ने जेडीयू का दामन थाम लिया और जमा खान को मंत्री मंडल में शामिल भी किया गया।  इसके बाद नीतीश सरकार के पास 127 विधायकों का बहुमत है।

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