कृपया अपने कुर्सियों की पेटी बांध ले। अगर आप एक गाड़ी चालक है तो सीट बेल्ट लगाना बिल्कुल ना भूलें, अगर आप टू व्हीलर से ट्रैवल करना पसंद करते हैं तो हेलमेट घर पर भूलना आपको काफी महंगा पड़ सकता है और अगर आप ऑटो ड्राइवर है तो भैया 10 रुपए के लालच में एक सवारी ज्यादा बैठाने के चक्कर में आप अपने ऑटो से हाथ धो बैठेंगे। ये हम नहीं, सरकार का नया फरमान कह रहा है।

बिहार में बढ़ती रोड दुर्घटनाओं को मद्देनजर रखते हुए परिवहन मंत्री शीला मंडल और परिवहन सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने बिहार के सभी जिलों के परिवहन पदाधिकारियों के साथ बैठक की थी। बैठक में मुख्यरूप से सड़क दुर्घटनाओं के कारण और समाधान को लेकर चर्चा हुई और एक बड़ा फैसला लिया गया। नए फैसले के मुताबिक ऐसे जो भी वाहन होंगे जो सड़क दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार होंगे उनका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाएगा, इतना ही नहीं इसके अलावा जो ड्राइवर सड़क दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार होगा उसका भी लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

बैठक में ऑटो में सवार लोगों की ओवरलोडिंग का भी मुद्दा छेड़ा गया और बसों में ओवरलोडिंग की भी चर्चा की गई। चर्चा इस निष्कर्ष पर पहुंची की ऑटो और बस में लोगों की ओवरलोडिंग पर रोकथाम लगाने के लिए विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा। परिवहन मंत्री शीला मंडल ने लोगों से सड़क सुरक्षा नियमों को गंभीरता से लेने और उनका पालन ठीक तरीके से करने की अपील की है। उन्होंने दो पहिया वाहन चलाने वाले लोगों को हमेशा हेलमेट पहनने की नसीहत भी दी है।

याद दिला दें कि रोड सेफ्टी प्रोग्राम के लॉन्च के दौरान शीला मंडल ने कहा था कि वो आने वाले दस सालों में सड़क हादसों में 50 प्रतिशत गिरावट लाने का इरादा रखती हैं। उन्होंने नौवीं और दसवीं के पाठ्यक्रम में रोड सेफ्टी के टॉपिक को जोड़ने के प्लान का भी ज़िक्र किया था। परिवहन विभाग ने जो डेटा रिलीज किया था उसके मुताबिक बिहार की राजधानी पटना में पिछले दो से तीन वर्षों में लोगों के हेलमेट पहनने में 90 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और बाकी जिलों में आंकड़ा इसी प्रतिशत के आसपास का है।

इसके अलावा अगर पिछले साल जनवरी से दिसंबर के बीच सड़क हादसों की बात करें तो उनमें 13.73 प्रतिशत की गिरावट आई है और अगर सड़क हादसों में होने वाली मौत के आंकड़े की बात हो तो उनमें 7.9 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। वर्ष 2019 में सबसे ज़्यादा सड़क हादसे नेशनल हाईवे और स्टेट हाइवे पर हुए थे।

ये सब तो फिर कागजी बातें हो गई अब जरा एक नजर सच्चाई पर डालते हैं।

बिहार सरकार के मंत्री सड़क सुरक्षा नियमों को गंभीरता से लेने की बात कर रहे हैं मगर यही मंत्री विधानसभा तक पहुंचने में मोटर व्हीकल एक्ट की धज्जियां उड़ा देते हैं। मोटर व्हीकल एक्ट को गंभीरता से लेने के लिए उसके नियमों से लेकर फाइन कड़ा बनाया गया है। इस एक्ट के मुताबिक गाड़ी में हाई सिक्योरिटी नंबर का होना अनिवार्य है अगर गाड़ी में हाई सिक्योरिटी नंबर ना हो तो दो हज़ार का जुर्माना या एक महीने की सजा या फिर दोनों हो सकता है।

मगर कल विधानसभा में मंत्री से लेकर सैकड़ों विधायक ऐसे थे जो बिना हाई सिक्योरिटी नंबर वाली गाड़ी से विधानसभा में पहुंचे थे। उन पर होने वाली किसी कार्रवाई की कोई खबर अबतक तो सामने नहीं आई है। क्या ये मान लिया जाए ये सारे नियम कानून बस आम जनता के लिए हैं? अगर नेताजी नियम उल्लंघन करें तो इनपर कार्रवाई नहीं होगी? रोड सेफ्टी बस आम लोगों के लिए ज़रूरी है, नेताओं के पास कोई मायावी शक्ति है जो बिना नियमों का पालन किए उन्हें सड़क हादसों से बचाएगी?

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