26 जनवरी गणतंत्र दिवस के दिन किसानों ने ट्रैक्टर परेड निकाली. इस परेड के दौरान कई जगहों पर हिंसक झड़प देखने को मिली. पुलिस और किसान दोनों को चोटें आई हैं. वहीं एक किसान की मौत की भी खबर है. कुछ इलाकों में रात 12 बजे तक इंटरनेट सेवा को अस्थाई तौर पर सस्पेंड कर दिया गया है. वहीं किसान नेताओं ने इस हिंसा से खुद को अलग कर लिया है.

इन सब घटनाक्रम के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हिंसा की निंदा की. ट्वीट किया –

“हिंसा किसी समस्या का हल नहीं है. चोट किसी को भी लगे, नुक़सान हमारे देश का ही होगा. देशहित के लिए कृषि-विरोधी क़ानून वापस लो!”

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट किया –

“दिल्ली की सड़कों पर जो कुछ हुआ, उससे दुखी और चिंतित हूं. इसके लिए केंद्र सरकार की संवेदनहीन रवैया और किसान भाइयों-बहनों से भेदभाव ज़िम्मेदार है. पहले इन कानूनों को किसानों को विश्वास में लिए बिना पास कर दिया गया. फिर देश भर में विरोध के बाद भी सरकार ने इस पूरे मुद्दे को काफी हल्के तरीके से डील किया. केंद्र सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए और इन कानूनों को तुरंत रद्द करना चाहिए.”

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने ट्विटर पर लिखा –

“दिल्ली में वीभत्स दृश्य. कुछ तत्वों की फैलाई ये हिंसा स्वीकार्य नहीं है. इससे प्रदर्शनकारी किसानों की भलमनसाहत पर पानी फिर जाएगा. किसान नेताओं ने खुद को अलग कर लिया है और ट्रैक्टर रैली रद्द कर दी है. मैं सभी असली किसानों से अपील करता हूं कि दिल्ली को खाली करके, सीमाओं पर लौट जाएं.”

NCP के शरद पवार ने कहा  –

“पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों ने अनुशासित तरीके से विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन सरकार ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया. उनका सब्र टूटा और ट्रैक्टर रैली निकाली गई. ये केंद्र सरकार की

ज़िम्मेदारी थी कि लॉ एंड ऑर्डर बना रहे, लेकिन वे फेल रहे.”

शरद पवार ने कहा कि जो हिंसा हुई, वो तो किसी के लिए भी स्वीकार्य नहीं है. लेकिन इसके पीछे के कारणों को भी नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता. शिवसेना के सांसद, प्रवक्ता संजय राउत ने हिंसा की निंदा की लेकिन सरकार से सवाल किया कि लाल किले में उपद्रवी घुस कैसे गए. उन्होंने ट्वीट किया –

“अगर सरकार चाहती तो आज की हिंसा रोक सकती थी. दिल्ली में जो चल रहा है, उसका समर्थन कोई नहीं कर सकता. कोई भी हो लाल किला और तिरंगे का अपमान सहन नही करेंगे. लेकिन माहौल क्यों बिगड़ गया? सरकार किसान विरोधी कानून रद्द क्यों नहीं कर रही? क्या कोई अदृश्य हाथ राजनीति कर रहा है?”

वहीं BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने ट्वीट किया –

“किसानों के नाम पर जिस तरह की अराजकता फैलाई जा रही है, उससे काफी दुखी हूं. लाल किले पर तिरंगे की जगह कोई और ध्वज फहराना हमारे गणतंत्र पर, लोकतंत्र पर हमला है.”

इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने भी बयान जारी करके हुए कहा है कि- आज के किसान गणतंत्र दिवस परेड में अभूतपूर्व भागीदारी के लिए हम किसानों का धन्यवाद करते हैं. हम उन अवांछनीय और अस्वीकार्य घटनाओं की भी निंदा करते हैं और खेद जताते हैं जो आज घटित हुई हैं. ऐसे कृत्यों में लिप्त लोगों से खुद को अलग करते हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here